सालों पहले मेरी एक दोस्त हुआ करती थी
मुझसे जब मिलती, हम-आगोश हुआ करती थी
उसकी हर बात पे मैं तंज़ किया करता था
मेरी हर बार वो तारीफ किया करती थी
कितनी नाराज़ ही हो क्यों न वो मुझसे लेकिन
मेरी ही ग़ज़लों से मसरूर हुआ करती थी
मेरे माथे पे शिकन जो नज़र आती उसको
हौसला देती, फिकरमंद हुआ करती थी
आज वो है तो सही लेकिन मेरे साथ नहीं
मुझको दिखती भी है, पर उससे कोई बात नहीं
बात तो दूर है, अब उससे मुलाक़ात नहीं
ग़ज़ल तो सुनती है, पर मेरे वो नग़मात नहीं
मैं नहीं जानता आख़िर उसे हुआ क्या है
और ये सोचता हूँ मुझसे हुई ख़ता क्या है
अब तो ये हाल है के तनहा जिए जाता हूँ
भीड़ में होता हूँ, खुद को अकेला पाता हूँ
मेरी ग़ज़लें, अब खुद को ही सुनाता हूँ
बस एक उम्मीद लिए अब मैं चला जाता हूँ
के एक दिन आएगा, खुशियों की बहार आएगी
पास आएगी वो, और चुपके से सदा देगी
मेरे अश्आर सुनेगी, और मुस्कुरा देगी
मैं उसपे तंज़ करूँगा, मुझे दुआ देगी
मेरी तारीफ़ करेगी, गले लगा लेगी....
मेरी तारीफ़ करेगी, गले लगा लेगी....


दिल की आवाज तो है लेकिन छात्रों को आज अपनी सोच को देश व समाज के बेहतरी के लिए कुर्वान करने की जरूरत है...देश भयंकर सामाजिक असमानता तथा चारित्रिक पतन के साजिश के संकट से गुजर रहा है....
ReplyDeletebahut hi achha likha hai aapne..
ReplyDeleteyakin maniye padhte-padhte main soch aur kuchh hadh tak mayusi me doob gayi..
God Job.. Keep it up !!
sachmuch ye Aa.. Dil ki aawaj hai :-)
आदिल भाई हिन्दुस्तान बहुत टूटे दिलों का देश है। ये नज्म उन सारे दिलों को सुकून पहुँचायेगी!!
ReplyDeleteउम्मीद है कि वो दिन आपकी जिंदगी में बहुत जल्दी आएगा जब आपके चारों तरफ खुशियां ही खुशियां होंगी।
ReplyDeletebahut acchha likhte hain bhai.. likhte rahiye..
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