ज़िंदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं, मैं तो मर के भी मेरी जान तुझे चाहूंगा........... हर साल फरवरी का महीना आते ही ज़्यादातर युवाओं की ज़बान पर यह धुन होती है। कोई अपनी दीवानगी की सारी हद तोड़ने की जि़द में है तो किसी को फिर से शर्म-ओ-हया की चादर ओढ़े खाली हाथ लौटने का डर सता रहा है। कोई दोस्तों से लगी शर्त जीतना चाहता है तो कोई अपना सब कुछ हार के भी किसी को पाने की तमन्ना लिए बैठा है। इन सारी दीवानगी की हद के पीछे एक जादुई वाक्य है-”आई लव यू”। यह अल्फाज़ सुनने में भले ही बहुत आसान लगे पर कहना है उतना ही मुश्किल। यह ऐसे है जैसे साहिल समंदर के क़रीब होते हुए भी अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने की कोशिश कर रहा हो।
14 फरवरी यानि वैलेन्टाइन डे यानि प्यार करने का दिन। आज की इस दौड़ती भागती दुनिया में हमारे पास वक़्त की इतनी कमी है कि हमने प्यार मुहब्बत के लिए भी एक ख़ास दिन मुक़र्रर कर रखा है। प्यार एक ख़ूबसूरत एहसास होता है, जैसी बात आज के समय में आउटडेटेड सी हो गई है। आज प्यार जताने की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है। प्यार की बुनियाद वैलेन्टाइन डे पर किए जाने वाले गिफ्ट्स के आदान प्रदान के इर्द-गिर्द आकर टिक गई है। गिफ्ट्स जितने महंगे और आकर्षक होंगे प्यार में उतना ही टिकाऊपन आएगा।
फरवरी का दूसरा हफ्ता आते ही वैलेन्टाइन वीक की शुरूआत हो जाती है। रोज़ डे, प्रोपोज़ डे, चॉकलेट डे, न जाने कौन-कौन से डे सेलिब्रेट किए जाते हैं। बाज़ारवाद इस क़दर हावी है कि सब अपने प्रॉडक्ट को खपाने की जुगत में लगे हैं। वैलेन्टाइन डे का कल्चर अब सिर्फ बड़े शहरों की बात नहीं रह गई है। बाज़ार ने इसे मेट्रो और मॉल के साथ साथ गांव-देहात की दुकान तक पहुंचा दिया है। अब तो समस्तीपुर, बिहार के एक छोटे से कस्बे में रहने वाला रमेश भी वैलेन्टाइन डे की बात करने लगा है। रमेश बहुत मुश्किल से यह बता पाता है कि युवा दिवस कब आता है लेकिन यह बताने में उसे कोई देर नहीं लगती कि 7 फरवरी रोज़ डे है।
प्यार अब इतना टेंपरेरी हो चुका है कि कब इसे बदलने की नौबत आ जाए पता नहीं होता। महानगरों में तो प्यार के अलग-अलग टेस्ट देखने को मिलते हैं। दिल्ली में रहने वाले अनूप इतने दिल फेंक हैं कि इस वैलेन्टाइन वह चौथी लड़की पर उस जादुई अल्फाज़ का इस्तेमाल करने जा रहे हैं। दक्षिणी दिल्ली में रहने वाले मनीष की तो कहानी ही कुछ अलग है। मनीष वंदना से बहुत प्यार करते हैं। वंदना का दिल महंगी ज्वेलरी के लिए धड़कता है। अब मनीष अपने प्यार को हासिल करने के लिए ज्वेलरी का सहारा लेने की सोच रहे हैं। आज के ज़्यादातर युवा प्यार को पाने के लिए इसी प्रपंच का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इस सब से परे कुछ ऐसे भी दीवाने हैं जो प्यार को एक ख़ूबसूरत एहसास भर ही मानते हैं। दिल्ली के जामिया विश्वविधालय में पढ़ने वाले इमरान का तो अंदाज़ ही जुदा है। वो पिछले कई सालों से दरख़्शां को चाहते हैं। इमरान आज तक इज़हार-ए-तमन्ना नहीं कर पाये हैं। उनका मानना है कि प्यार इतना कमज़ोर नहीं होता कि चॉकलेट और दूसरे गिफ्ट्स का वो मोहताज हो। इमरान कहते हैं कि मैं शायद कभी अपनी मुहब्बत का इज़हार न कर पाऊं लेकिन अपनी तरफ से ज़िन्दगी भर उसे उतनी ही शिद्दत से चाहता रहूंगा जितना आज चाहता हूं।
वैलेन्टाइन डे हर साल आएगा। नए-नए वादे किए जाएंगे। उन वादों को पूरा करने के लिए बाज़ार भी नया आईडिया लाएगा। अभी तो सिर्फ वैलेन्टाइन वीक सेलिब्रेट किए जाते हैं। वो दिन भी दूर नहीं जब वैलेन्टाइन मंथ की शुरूआत हो जाएगी। सवाल यह है कि क्या बाज़ारवाद का असर इमरान जैसे गिने-चुने लोगों पर भी पड़ेगा जिनके लिए वैलेन्टाइन डे ही एकमात्र खास दिन नहीं बल्कि हर पल हर लम्हा वैलेन्टाइन होता है।


No comments:
Post a Comment